Thursday, May 4, 2017

SHADI ME SHIV KRIPA

जब भगवान शिव अपनी कृपा प्रत्यक्ष रूप से बरसाते है। वह  नजारा ही बडा अदुभूत होता हैं। कई वर्ष पूर्व कि बात है कि एक सज्जन भगवान शिव के परम भक्त थे। उनकी पुत्री का विवाह निश्चित हुआ था। लडके वालों ने उनसे इतना धन  की मांग की जो उस सज्जन की समर्थ से बाहर था।
        शादी वैशाख मास मे तय हो गई । उस मनुष्य ने अपना जीवन का प्रत्येक कार्य भगवान शिव को समर्पित करता था।     उसने तिलक के रूप बहुत बड़ी रकम अदा की थी , सारी तैयारी बड़ी लग्न से की थी | शादी का दिन आ गया, सब तैयारी कर ली थी ,उसके पास बैड -बाजे के पैसे नहीं थे अब वह चिन्ता करने लगा क्या होगा, बरात आने वाली है, तब भगवान शिव मन्दिर गया और भगवान के शिव लिंग सिर रख कर रोना शुरू कर दिया |उसने भगवान से प्रार्थना कि आपने इतना सब किया है क्या एक बाजे का प्रबन्ध नहीं कर सकते हो |
उधर से बरात ने गॉँव में प्रवेश किया बैड -बाजे के साथ
स्वागत के उस सज्जन को ढूढ़ना शुरू कर दिया | गांव वालो ने सोचा कि वह सज्जन मन्दिर में मिलेंगे | लोगों वहाँ जा कहा कि बरात  आई गई है तुम चलो, उसने कहाँ की बाजे का प्रबन्ध नहीं हुआ है |
अब क्या मुँह दिखाऊँ ?
तब उसको उत्तर मिला बाजा तो बज रहा है | अब किस बात की चिन्ता कर रहे हो | शायद बरात वाले बजा लेकर आये हो | शादी बड़ी अच्छी प्रकार से सम्पन हो गई थी | भोजन के समय हो गया और सारी बरात वालों ने भोजन कर लिया, केवल बाजे वाले शेष रह गये | बाजे वाले कहि दिखाई दिये, बाद वर के से पुछा की बाजे वाले कहा है | उन्होने ने कहा कि वह आपके के आदमी थे

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