Wednesday, March 28, 2018

Justice in the world

It is a matter of time that after the very prayer of an elderly couple, their son's family lineage increased. Children were born as a son. Unless the child was three years old, he was not allowed to see. One day the father of the child came to know that there is so many defects in the age of my child that he can not be healthy. He made a solution that where his parents lived, by putting a picture of his child on his father, told his father that you put your room on the picture of my son and always keep it in light. Increased parents kept their grandchildren always in the light of their offspring. They did not know what would be the result of this matter. Suddenly the old man suddenly became ill and suddenly he left the world. Nobody has realized what has happened. Only God was the person that his son did what he did. The age of his child has killed his father of old age. People do not have the impression of what they do because of their own selfishness. Still, they remain as good parents of their mother. God does not know that Leela does not pay any damages to anyone. When no one knows, the justice will be becomes.

Tuesday, June 13, 2017

भगवान बद्रीविशाल की अनुपम कृपा --


भगवान बद्रीविशाल की अनुपम कृपा
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-एक सज्जन रक्षा विभाग में कार्यरत थे, उनको धार्मिक यात्रा करने का बहुत शौक था | उन्होंने पुरी,रामेश्वरम और द्धारकाधाम की यात्रा कर चुके थे, केवल बद्रीनाथ धाम ही बचा था, सो वह अपने सेवाकाल में एल० टी ० सी पर बद्रीनाथधाम की यात्रा जाने चाहते थे और वहाँ पर जाने का निश्चय किया | 
                वे बॉम्बे से वह हरिद्धार आये  और 2009 की कार्तिक पूर्णिमा पर हर की पौड़ी में स्नान किया और दीपदान करने के वहाँ से बद्रीनाथ धाम की यात्रा आरम्भ की , रात्रि में जोशीमठ पहुँचे और रात्रि में वहाँ विश्राम किया | आधे घंटे वहाँ  पहुँच गये, गाड़ी ड्राइवर उन्हें उतार कर गाडी़ ठीक करवाने चला गया ।वह बीमार थे और १०० मीटर चलना भी मुश्किल हो गया।बलड प्रेशर का मरीज थे वहाँ पर उनकी साँस लेने की तकलीफ हो गई। बड़ी कठिनाई से मंदिर पहुँचे ।
           दर्शन से पहले तपतकुणड मे स्नान करने की परम्परा है।उसके पास नर-नारायण पर्वत जमी बर्फ के साथ  तपतकुणड के गरम पानी का सामंजस्य सिर्फ प्रभु की लीला लगती थीं। स्नान के पश्चात वह महिला प्रसाद लेने साथ वाली दुकान पर गई।तो दुकानदार ने कहा पट बंद होने वाले हैं आप जाओ मै प्रसाद बाबू जी को दे दूंगा। बाद उस महिला के पति प्रसाद लेकर आ ये और दोनों ने जी भर कर बदरीविशाल के दर्शन किए।खिचड़ी का भोग प्रसाद मे खाया और भगवान को धन्यवाद दिया।
            वापस की यात्रा करण प्रयाग मे रात्रि का विश्राम किया।दूसरे दिन पुनः यात्रा आरंभ की श्रीनगर की धारी देवी के दर्शन करते हुए शाम को हरिद्वार लौट आ ये।रात को 9 बजे मथुरा और ब्रज भूमि के दर्शन के लिए चल दिये। सारे दिन के थके थे, सो शीघ्र नींद आ गयी। अचानक उस महिला की नींद घबडा़हटके  कारण खुल गयी और महिला ने पति को झकझोर कर उठाया ।उनको घबडा़ गये कि एक्सी डेनट तो नहीं हो गया है। परंतु सब कुछ ठीक था, तब उन साहेब ने पूछा कि क्या हुआ है तब उस महिला ने बताया कि मैंने एक पीतवस्त्रधारी सामने देखा था,जो पूछ रहे थे कि दर्शन हो गये अच्छे से। मैंने उन्हें जबाब दिया कि हाँ पर आप कहाँ चले गये थे? मैं आपको को कुछ भेंट भी नहीं दे सकी। वो बोले कि तुम्हें दर्शन हो गये, मुझे तुमसे सब कुछ मिल गया।जब चेतनावसथामे आयी तो सामने कोई नहीं था । तभी मुझे मंदिर की सीढ़ियों पर घटित घटना याद आ गई और उसे आपको बताने के लिये उठा दिया।
    उसके बाद मुझे याद आया कि दुकानदार द्वारा पट बंद होने वाले हैं और  वह महिला तेजी से मंदिर की चली वहाँ पर सीढ़ियों देख कर उसका दिल बैठ गया कि किसी प्रकार चढ़ पाऊँगी? दो चार सीढ़ियों चढ़ने के बाद मा वहाँ पर बैठ गई तथा उसका साँस फूलने लगा विचार करने लगी दर्शन कैसे हो गे ? वहाँ पर इन्हीं पीतवस्त्रधारी को अपने सामने खड़े देखा, उन्होंने ने हाथ बढ़ कर पूछ रहे थे क्या दर्शन करना हैं। उसने कहाँ हाँ तो वह हाथ बढ़ा कर ऊपर बढ़ने ले गे।उसे पता नहीं लगा कि किस प्रकार गर्भ गृह मे पहुँची और पट बंद हो रहे थे और वह महिला प्रभु के सामने खड़ी थीं। उसके बाद वह महिला भूल गई थी। वह सोच रही थी क्या स्वयं आकर उसे दर्शन दिए।यह उस महिला का श्रद्धा और विश्वास तथा आस्था थी ,जो इसे प्रकार की घटना घटी थी।

Wednesday, May 17, 2017

NADI SHASTRA

ज्योतिष शास्त्र मे नाड़ी का अर्थ समय का एक मात्रा नाम है।जो की आधे मुहूर्त के बराबर होती हैं।जिस प्रकार होरा (काल) अर्थात् दिन-रात का सूचक माना जाता हैं।नाड़ी शब्द भी समय वाचक हैं।नाड़ी शास्त्र दक्षिण भारत मे अधिक प्रचलित हैं।नाड़ी ग्रन्थ मनुष्य के जीवन की समस्त जीवन की घटनाओं का वर्णन करनेवाला ग्रन्थ हैं।
नाड़ी शास्त्र की विशेषता :-
उत्तरी भारत मे भृगु संहिता, अरूण संहिता, रावण संहिता आदि प्रसिद्ध ग्रन्थ हैं। इन ग्रन्थों मे भविष्य और भूतकाल मे उत्पन्न होने वाली मनुष्य की सभी बातों का ज्ञान वृत्तान्त का विस्तृत लिखा है।
दक्षिण भारत मे नाड़ी शास्त्र मे नन्दी नाड़ी, शुक्र नाड़ी, भुजंदर नाड़ी, सप्तऋषि नाड़ी आदि ग्रन्थ हैं जिसमें मनुष्य जीवन का भूत औऱ भविष्य काल का विस्तृत ज्ञान मिलता हैं।
चन्द्र नाड़ी :- इस नाड़ी को जन्म नाड़ी के रुप मे भी जाना जाता हैं।इसमे मनुष्य के सभी रिश्ते जैसे कि मां, पिता, भाई-बहन, मामा,सुसराल पक्ष के विषय मे जानकारी मिलती हैं।इसके साथ अंशों का पूरण ज्ञान मिलताहै।इन नाड़ी अंशों की संख्या 150 हैं।इन की गिनती इस प्रकार की जाती हैं:-
 यदि चर राशि का लगन हो तो इसकी गणना  1.वसुधा,2.वैष्णवी, 3.ब़ाह्मी,4 कालकूटादि,5.शांकरी,   6.सुधाकरी,7.समा,8.सौम्या, 9.सुरा,10.माया, 11.मनोहरा,12.माधवी,13.धारा, 14.मालिनी, 15.मञ्जुसवना16.कुभिमनी,17.कुटिला,18.जगती,19.प्रभा,20.परा,21.पयस्विनी,22.जर्जरा,23.ध्रुवा,24.     .मुसला,25.मुद्गगरा26.पाशा, 27.चमपका,28.दामा,29.मही,30.कलुषा,31.कमला,32.कान्ता, 33.कालिका,34.करिटरा,35.क्षमा,36.दुधररा,37.दुरभगा,38.विशवा,39.विकटा,40.कला ,41.भूपा,42.नदी, 43.निर्मला,44.विशीर्णा,45.अबला,46.विभ्रमा, 47.सुरसुन्दरी,48.सुखदा,49.सिनगधा,50.सोदरा,51.अबला52.अमृत पलाविनी 53.कामधुक्54.करवारिणी 55.गहहरा56.कुनदिनी 57.रौद्रारा58.विषाखया59.विषनाशिनी 60.निर्मदा 61.शीतला 62.निम्ना 63.प्रीता 64.प्रियवधरनी 65.मानघना 66.दुभर्गा 67.चित्रा 68.चित्रिणी 69.चिरंजीवीनी 70.गदहरा71.नाला 72.नलिनी 73.सुधामृतांशुकलिका74.कुलषांकुरा 75.महामारी

                                                               
सुधा
     .                            

Tuesday, May 16, 2017

प्रसिद्ध समृतियाँ

कुछ प्रसिद्ध समृतियाँ जिनका उल्लेख इस प्रकार हैं। 1.मनुस्मृति2.वृद्वमनुसमृति 3.याज्ञवलक्य समृति 4.वृद्वयाज्ञवलकयसमृति 5अत्रिसमृति 6.विष्णु समृति 7.बृहद् विष्णु समृति 8.हारीतसमृति 9.लघु हारीतसमृति 10.औशनससमृति 11.आंगिरससमृति 12.यमसमृति 13.बृहद् यमसमृति 14.आपस्तम्ब समृति 15.संवर्तसमृति 16.कात्यायनसमृति 17.पराशर समृति 18.बृहसपयतिसमृति 19.बृहद् पराशरीय धर्म शास्त्र 20.व्याससमृति21.शंख समृति 22.लघुशंख समृति 23.लिखित समृति 24.शंख-लिखित समृति 25.दक्षसमृति 26.गौतमसमृति 27.शातातपसमृति 28.दूसरी शातातपसमृति 29.वृद्वशातातप समृति 30.वसिष्ठ समृति 31.वृद्व वसिष्ठ समृति 32.प्रजा पति समृति 33.देवलसमृति 34.नारदसमृति 35.

Thursday, May 4, 2017

SHADI ME SHIV KRIPA

जब भगवान शिव अपनी कृपा प्रत्यक्ष रूप से बरसाते है। वह  नजारा ही बडा अदुभूत होता हैं। कई वर्ष पूर्व कि बात है कि एक सज्जन भगवान शिव के परम भक्त थे। उनकी पुत्री का विवाह निश्चित हुआ था। लडके वालों ने उनसे इतना धन  की मांग की जो उस सज्जन की समर्थ से बाहर था।
        शादी वैशाख मास मे तय हो गई । उस मनुष्य ने अपना जीवन का प्रत्येक कार्य भगवान शिव को समर्पित करता था।     उसने तिलक के रूप बहुत बड़ी रकम अदा की थी , सारी तैयारी बड़ी लग्न से की थी | शादी का दिन आ गया, सब तैयारी कर ली थी ,उसके पास बैड -बाजे के पैसे नहीं थे अब वह चिन्ता करने लगा क्या होगा, बरात आने वाली है, तब भगवान शिव मन्दिर गया और भगवान के शिव लिंग सिर रख कर रोना शुरू कर दिया |उसने भगवान से प्रार्थना कि आपने इतना सब किया है क्या एक बाजे का प्रबन्ध नहीं कर सकते हो |
उधर से बरात ने गॉँव में प्रवेश किया बैड -बाजे के साथ
स्वागत के उस सज्जन को ढूढ़ना शुरू कर दिया | गांव वालो ने सोचा कि वह सज्जन मन्दिर में मिलेंगे | लोगों वहाँ जा कहा कि बरात  आई गई है तुम चलो, उसने कहाँ की बाजे का प्रबन्ध नहीं हुआ है |
अब क्या मुँह दिखाऊँ ?
तब उसको उत्तर मिला बाजा तो बज रहा है | अब किस बात की चिन्ता कर रहे हो | शायद बरात वाले बजा लेकर आये हो | शादी बड़ी अच्छी प्रकार से सम्पन हो गई थी | भोजन के समय हो गया और सारी बरात वालों ने भोजन कर लिया, केवल बाजे वाले शेष रह गये | बाजे वाले कहि दिखाई दिये, बाद वर के से पुछा की बाजे वाले कहा है | उन्होने ने कहा कि वह आपके के आदमी थे

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Justice in the world

It is a matter of time that after the very prayer of an elderly couple, their son's family lineage increased. Children were born as a so...